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पूर्णिया में मिड-डे मील में कीड़ा मिलने पर सख्ती, जांच में लापरवाही उजागर, निगरानी बढ़ाने के निर्देश

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पूर्णिया के बनमनखी में मिड-डे मील में कीड़ा मिलने के बाद जांच में रसोइयों की लापरवाही सामने आई। प्रशासन ने सख्त निगरानी और गुणवत्ता सुधार के निर्देश दिए।

पूर्णिया/आलम की खबर:बिहार के पूर्णिया जिले के बनमनखी अनुमंडल क्षेत्र से सामने आए मध्याह्न भोजन (एमडीएम) में कीड़ा मिलने के मामले ने शिक्षा व्यवस्था और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकारी विद्यालयों में बच्चों को परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं, लेकिन इस ताजा घटना ने एक बार फिर व्यवस्था की खामियों को उजागर कर दिया है। मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग ने इसे अत्यंत गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच शुरू कर दी, जिसमें कई अहम तथ्य सामने आए हैं।घटना के बाद प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी मौके पर पहुंचे और पूरे मामले की गहराई से जांच की। इस दौरान विद्यालय परिसर में भोजन आपूर्ति करने वाली संस्था के प्रतिनिधियों, प्रधानाध्यापक, शिक्षकों, छात्रों और अभिभावकों के साथ बैठक की गई। बैठक में ग्रामीणों और अभिभावकों ने साफ तौर पर शिकायत की कि पिछले कुछ समय से बच्चों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता लगातार गिरती जा रही है। कई बार भोजन में गड़बड़ी की शिकायत की गई, लेकिन समय पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे समस्या बढ़ती गई।

जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि भोजन तैयार करने में साफ-सफाई और गुणवत्ता मानकों का ठीक से पालन नहीं किया जा रहा था। प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी की रिपोर्ट में भी यह बात सामने आई कि रसोइयों में पर्याप्त सजगता का अभाव है और भोजन तैयार करने की प्रक्रिया में कई स्तरों पर लापरवाही बरती जा रही है। इस लापरवाही के कारण ही भोजन में कीड़ा मिलने जैसी गंभीर घटना सामने आई, जो बच्चों के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।

जिला प्रशासन ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित स्वयंसेवी संस्था को कड़ी चेतावनी दी है। संस्था को निर्देश दिया गया है कि भोजन की गुणवत्ता में तुरंत सुधार किया जाए और रसोइयों को आवश्यक प्रशिक्षण दिया जाए ताकि वे विभागीय मानकों के अनुरूप भोजन तैयार कर सकें। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

पूर्णिया के जिलाधिकारी ने भी इस मामले में सख्त रुख अपनाया है। उनके निर्देश पर बनमनखी स्थित किचेन की निगरानी के लिए विशेष व्यवस्था लागू की गई है। अब रोजाना रोस्टर के आधार पर सरकारी कर्मियों की प्रतिनियुक्ति की गई है, जो भोजन तैयार होने से लेकर वितरण तक की पूरी प्रक्रिया पर नजर रखेंगे। इस निगरानी व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चों को साफ, सुरक्षित और पोषक भोजन मिल सके।

इसके अलावा जिलाधिकारी ने जिला कार्यक्रम पदाधिकारी को भी निर्देश दिया है कि वे किचेन का नियमित निरीक्षण करें और विभागीय मानकों के अनुपालन को लेकर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि पूरे सिस्टम में पारदर्शिता लाई जा सके और किसी भी तरह की लापरवाही को तुरंत पकड़ा जा सके।

यह मामला केवल एक विद्यालय या एक प्रखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे राज्य के लिए एक चेतावनी है। मिड-डे मील योजना का उद्देश्य बच्चों को पोषण देना और स्कूलों में उनकी उपस्थिति बढ़ाना है, लेकिन अगर भोजन की गुणवत्ता ही संदिग्ध हो जाए तो यह योजना अपने उद्देश्य से भटक सकती है। ऐसे में जरूरी है कि प्रशासन, विद्यालय प्रबंधन और आपूर्ति करने वाली संस्थाएं मिलकर इस व्यवस्था को मजबूत बनाएं।

विशेषज्ञों का मानना है कि मिड-डे मील की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण, प्रशिक्षण और जवाबदेही तय करना बेहद जरूरी है। साथ ही अभिभावकों और स्थानीय समुदाय की भागीदारी भी इस व्यवस्था को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभा सकती है। यदि समय रहते इन पहलुओं पर ध्यान नहीं दिया गया, तो इस तरह की घटनाएं दोहराई जा सकती हैं, जो बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों पर नकारात्मक असर डालेंगी।

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